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Thursday, June 4, 2026

श्रीलंका बनाम वेस्टइंडीज: रोमांचक मुकाबले में सितारों का जलवा

श्रीलंका बनाम वेस्टइंडीज: रोमांचक मुकाबले में सितारों का जलवा

क्रिकेट जगत में Sri Lanka National Cricket Team और West Indies Cricket Team के बीच होने वाले मुकाबले हमेशा रोमांच से भरपूर रहते हैं। दोनों टीमों के पास ऐसे खिलाड़ी हैं जो अकेले दम पर मैच का रुख बदल सकते हैं। हालिया मुकाबले में भी दर्शकों को शानदार बल्लेबाजी, घातक गेंदबाजी और बेहतरीन फील्डिंग देखने को मिली।

श्रीलंका की मजबूत बल्लेबाजी

श्रीलंका की ओर से Pathum Nissanka और Kusal Mendis ने टीम को मजबूत शुरुआत दिलाई। दोनों बल्लेबाजों ने संयम और आक्रामकता का बेहतरीन संतुलन दिखाते हुए वेस्टइंडीज के गेंदबाजों पर दबाव बनाया।

मध्यक्रम में Kamindu Mendis ने अपनी शानदार तकनीक और धैर्य का परिचय दिया। उन्होंने महत्वपूर्ण रन बनाकर टीम को बड़े स्कोर की ओर अग्रसर किया।


वेस्टइंडीज की चुनौती

वेस्टइंडीज की ओर से कप्तान Shai Hope ने पारी को संभालने की कोशिश की। उनके साथ Keacy Carty और Justin Greaves ने उपयोगी योगदान दिया।

हालाँकि श्रीलंका के गेंदबाजों ने नियमित अंतराल पर विकेट लेकर वेस्टइंडीज को खुलकर खेलने का मौका नहीं दिया।


गेंदबाजों का दबदबा

श्रीलंका की गेंदबाजी में Wanindu Hasaranga और Maheesh Theekshana ने अपनी स्पिन का जादू बिखेरा। दोनों गेंदबाजों ने मध्य ओवरों में रन गति पर लगाम लगाई और महत्वपूर्ण विकेट हासिल किए।

तेज गेंदबाज Dushmantha Chameera ने नई गेंद से शानदार प्रदर्शन करते हुए विपक्षी बल्लेबाजों को परेशान किया।

वहीं वेस्टइंडीज की तरफ से Alzarri Joseph और Jayden Seales ने अपनी तेज रफ्तार गेंदों से श्रीलंकाई बल्लेबाजों को चुनौती दी।


मैच का निष्कर्ष

श्रीलंका और वेस्टइंडीज के बीच यह मुकाबला क्रिकेट प्रेमियों के लिए किसी उत्सव से कम नहीं था। दोनों टीमों के खिलाड़ियों ने शानदार प्रदर्शन किया, लेकिन श्रीलंका की संतुलित बल्लेबाजी और अनुशासित गेंदबाजी ने उन्हें बढ़त दिलाई।

Pathum Nissanka, Kusal Mendis, Kamindu Mendis, Wanindu Hasaranga और Shai Hope जैसे खिलाड़ियों के प्रदर्शन ने मैच को यादगार बना दिया।

श्रीलंका बनाम वेस्टइंडीज की यह प्रतिद्वंद्विता आने वाले वर्षों में भी क्रिकेट प्रशंसकों को ऐसे ही रोमांचक मुकाबले देती रहेगी।

Monday, March 18, 2024

माइंडफुलनेस की शक्ति को अनलॉक करना: आज ही अपना जीवन बदलें"

"माइंडफुलनेस की शक्ति को अनलॉक करना: आज ही अपना जीवन बदलें"

माइंडफुलनेस की शक्ति को अनलॉक करना: आज ही अपना जीवन बदलें"

आज की तेज़-तर्रार दुनिया में, जहाँ विकर्षण प्रचुर मात्रा में हैं और तनाव का स्तर बढ़ गया है, माइंडफुलनेस की अवधारणा अपने जीवन में शांति, स्पष्टता और पूर्णता चाहने वाले कई लोगों के लिए आशा की किरण बनकर उभरी है। कॉरपोरेट बोर्डरूम से लेकर कक्षाओं तक, एथलीटों से लेकर कलाकारों तक, माइंडफुलनेस को एक परिवर्तनकारी अभ्यास के रूप में अपनाया जा रहा है, जिसमें हमारे रहने, काम करने और एक-दूसरे से संबंधित होने के तरीके में क्रांतिकारी बदलाव लाने की क्षमता है।

वास्तव में माइंडफुलनेस क्या है और यह इतना ध्यान क्यों आकर्षित कर रही है? इसके मूल में, माइंडफुलनेस बिना किसी निर्णय के, पूरी तरह से मौजूद रहने और उस क्षण में लगे रहने का अभ्यास है। इसमें हमारे विचारों, भावनाओं, संवेदनाओं और परिवेश पर जानबूझकर ध्यान देना, अपने और अपने आस-पास की दुनिया के बारे में गहरी जागरूकता को बढ़ावा देना शामिल है।

माइंडफुलनेस के लाभ व्यापक और अच्छी तरह से प्रलेखित हैं। शोध से पता चला है कि नियमित माइंडफुलनेस अभ्यास से तनाव, चिंता और अवसाद कम हो सकता है। यह फोकस, एकाग्रता और संज्ञानात्मक कार्य में सुधार कर सकता है। यह भावनात्मक विनियमन और लचीलेपन को बढ़ा सकता है, व्यक्तियों को जीवन की चुनौतियों को अधिक आसानी और अनुग्रह के साथ नेविगेट करने के लिए सशक्त बना सकता है।

लेकिन शायद सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि सचेतनता में खुशी और संतुष्टि की गहरी भावना पैदा करने की शक्ति होती है, जो बाहरी उपलब्धियों या संपत्ति में नहीं, बल्कि जीवित रहने के सरल आनंद में निहित होती है। यह हमें कृतज्ञता और प्रशंसा के साथ जीवन के बड़े और छोटे दोनों क्षणों का आनंद लेने के लिए आमंत्रित करता है।

तो आप अपने दैनिक जीवन में माइंडफुलनेस को कैसे शामिल कर सकते हैं और इसकी परिवर्तनकारी क्षमता को कैसे अनलॉक कर सकते हैं? आरंभ करने के लिए यहां कुछ व्यावहारिक सुझाव दिए गए हैं:

सांस से शुरू करें: सांस वर्तमान क्षण का आधार है। प्रत्येक दिन कुछ क्षण अपनी सांसों पर ध्यान केंद्रित करने के लिए निकालें, अपने शरीर के अंदर और बाहर बहने वाली हवा की अनुभूति पर ध्यान दें। यह सरल अभ्यास मन को शांत करने और आपका ध्यान केंद्रित करने में मदद कर सकता है।

माइंडफुल ईटिंग का अभ्यास करें: भोजन में जल्दबाजी करने या ऑटोपायलट पर खाने के बजाय, प्रत्येक काटने का स्वाद लेने के लिए समय निकालें। आप जो भोजन खा रहे हैं उसके स्वाद, बनावट और संवेदनाओं पर ध्यान दें। मन लगाकर भोजन करने से न केवल आपके भोजन का आनंद बढ़ सकता है बल्कि स्वस्थ खान-पान की आदतों को भी बढ़ावा मिल सकता है।

कृतज्ञता विकसित करें: प्रत्येक दिन कुछ क्षण यह सोचने के लिए निकालें कि आप किसके लिए आभारी हैं। यह एक सुंदर सूर्यास्त या किसी मित्र की ओर से एक दयालु भाव के रूप में कुछ सरल हो सकता है। कृतज्ञता विकसित करने से आपका दृष्टिकोण बदल सकता है और खुशी और कल्याण की बेहतर भावना को बढ़ावा मिल सकता है।

अपनी इंद्रियों को व्यस्त रखें: पूरे दिन अपनी इंद्रियों को नियंत्रित रखें। अपने वातावरण के दृश्य, ध्वनि, गंध, स्वाद और बनावट पर ध्यान दें। अपनी इंद्रियों को संलग्न करने से आपको वर्तमान क्षण में स्थिर रहने में मदद मिल सकती है और आपके आस-पास की दुनिया के लिए गहरी सराहना को बढ़ावा मिल सकता है।

गैर-निर्णय का अभ्यास करें: माइंडफुलनेस के मूल सिद्धांतों में से एक गैर-निर्णयात्मक जागरूकता है। अनुभवों को अच्छे या बुरे के रूप में लेबल करने के बजाय, उन्हें जिज्ञासा और खुलेपन के साथ देखने का प्रयास करें। गैर-निर्णय की खेती करने से तनाव कम करने और आत्म-करुणा बढ़ाने में मदद मिल सकती है।

औपचारिक अभ्यास के लिए अलग समय निर्धारित करें: अपनी दैनिक गतिविधियों में माइंडफुलनेस को शामिल करने के अलावा, औपचारिक माइंडफुलनेस अभ्यास के लिए समर्पित समय निर्धारित करें। इसमें ध्यान, योग, या अन्य सचेतन-आधारित व्यायाम शामिल हो सकते हैं। निरंतरता महत्वपूर्ण है, इसलिए नियमित रूप से अभ्यास करने का लक्ष्य रखें, भले ही यह प्रत्येक दिन केवल कुछ मिनटों के लिए ही क्यों न हो।

सामुदायिक सहायता प्राप्त करें: एक माइंडफुलनेस समूह में शामिल होने या अपने क्षेत्र में ध्यान कक्षा में भाग लेने पर विचार करें। ऐसे अन्य लोगों के साथ जुड़ना जो माइंडफुलनेस में आपकी रुचि साझा करते हैं, आपकी यात्रा में मूल्यवान समर्थन और प्रोत्साहन प्रदान कर सकते हैं।

याद रखें, माइंडफुलनेस कोई त्वरित समाधान या सभी के लिए एक जैसा समाधान नहीं है। यह आत्म-खोज और आत्म-जागरूकता की एक आजीवन यात्रा है। अपने प्रति धैर्य रखें और अपने अभ्यास को खुले दिल और दिमाग से करें।

जैसे ही आप सचेतनता की इस यात्रा पर आगे बढ़ते हैं, आप पाएंगे कि यह न केवल आपके व्यक्तिगत जीवन को बदल देता है बल्कि आपके आस-पास के लोगों पर भी सकारात्मक प्रभाव डालता है। उपस्थिति, करुणा और प्रामाणिकता विकसित करके, आपके पास अपने और दूसरों के लिए एक अधिक जागरूक और सार्थक दुनिया बनाने की शक्ति है।

तो इंतज़ार क्यों करें? आज ही अपनी माइंडफुलनेस यात्रा शुरू करें और अधिक जीवंत, पूर्ण जीवन जीने के लिए उपस्थिति की शक्ति को अनलॉक करें। आपकी यात्रा यहीं और अभी शुरू होती है।

Thursday, November 17, 2022

पलेठी सूर्य मंदिर की किसी को सुध नहीं ख़त्म हो रही है महान विरासत



सूर्य मंदिर का नाम सुनते ही हमारे सामने कोणार्क के सूर्य मंदिर की छवि बन जाती है, पर ऐसे ही दो सूर्य मंदिर और हैं जिनमे से एक कटारमल अल्मोड़ा में स्तिथ है तथा दूसरा पलेठी टिहरी गढ़वाल में।और मैं जिस सूर्य मंदिर के बारे में लिख रहा हूँ वो है टिहरी गढ़वाल की देवप्रयाग तहसील के ब्लॉक हिंडोलाखाल से 10 किलोमीटर की दूरी पर पलेठी गांव में स्तिथ ।



यह एक प्राचीन सूर्य मंदिर। मान्यता अनुसार 7वीं-8 वीं शताब्दी की प्राचीन अवधि से संबंधित गढ़वाल में हिंडोलाखाल से 10 किमी दूर यह सूर्य मंदिर, लुलेरा गुलेरा घाटी में स्थित हैं। अगर हम स्थानीय लोगों पर विश्वास करते हैं, तो ग्रामीणों द्वारा खुदाई में मंदिरों का एक समूह मिला था। जिनमे एक यह सूर्य मंदिर तथा एक शिव मंदिर प्राप्त हुए थे। भारत मे कोणार्क और कटारमल के अलावा तीसरा सूर्य मंदिर यंही स्तिथ है। इस सूर्य मंदिर के पत्थरों पर कौन सी लिपि में लिखा गया है ये आज भी एक चर्चा और खोज का विषय है। कुछ पत्थरों पर पाया गया है कि इनपर ब्राह्मी लिपि में लिखा गया है पर कुछ पर अभी स्तिथि स्पष्ट नही है भारतीय पुरातत्व विभाग के डॉ एसएन घई और डॉ के.वी. रमेश, ने 22 अक्टूबर 1968 को मंदिर के शिलालेखों का अध्ययन किया। महाराजाधिरराज परमेश्वर कल्याण वर्मन का नाम ब्रह्मी में संरचना पर एक प्रमुख उल्लेख पाया गया है। कुछ इतिहासकारों के अनुसार, सूर्य मंदिर 7वीं -8वीं शताब्दी के दौरान बनाए गए थे जब यह क्षेत्र ब्रह्मपुर के वरमानों के शासनकाल में था। अपने आप मे कई अनोखे राज समेटे यह सूर्य मंदिर पर्यटन और आध्यात्मिक दृष्टि से कई बड़ी संभावनाएं समेटे हुए है। इस मंदिर का डिजाइन अपने आप मे अलग और दुर्लभ है। आद्यात्मिकता और पर्यटन को साथ संजोने की दृष्टि से ये भारत की कुछ चुनिन्दा जगहों में से एक है।





पलेठी में सूर्य मंदिर इस अर्थ में विशेष हैं कि ये दक्षिण भारतीय परंपरा से अलग है। इस सूर्य मंदिर के पास में एक और मंदिर स्तिथ है जो भगवान भोलेनाथ का मंदिर है जो श्री चमनेश्वर महादेव के नाम से विख्यात है। दोनों मंदिर संस्कृतिक विरासत को संभाले हुए है किंतु सरकार और सरकारी मशीनरी के ढीले रवैये के कारण ये आज जिस जर्जर स्तिथि में है उसे गांव ही नही अपितु पूरे क्षेत्र के लोगो मे निराशा की भावना है उचित रखरखाव की कमी के कारण यह सूर्य मंदिर विलुप्त होने के कगार पर है। प्राचीन संरचनाएं जिनमें पुरातात्विक महत्व है, वे उचित रखरखावों न होने के कारण बर्बाद हो रहे हैं। आज इस मंदिर के पास में सड़क पहुंच गई है जिससे यंहा पहुंचना बहुत आसान हो गया है और इसके पुनः जीर्णोद्धार के लिए ज्यादा मेहनत की भी जरूरत नही पड़ेगी पर कोई भी सरकार या जिला प्रशासन इसकी सुध नही लेता है। अगर प्रशासन और सरकार इसपर ध्यान देते हैं तो भविष्य में हमारी इस महान धरोहर को एक बडे पर्यटन क्षेत्र के रूप में देखा जा सकता है। बस जरूरत है एक पहल की।

#राजबिष्ट


Tuesday, July 26, 2022

जब पिप्पलाद ने शनि देव को जला दिया था

जब पिप्पलाद ने शनि देव को जला दिया था 

श्मशान में जब महर्षि दधीचि के मांसपिंड का दाह संस्कार हो रहा था तो उनकी पत्नी अपने पति का वियोग सहन नहीं कर पायीं और पास में ही स्थित विशाल पीपल वृक्ष के कोटर में 3 वर्ष के बालक को रख स्वयम् चिता में बैठकर सती हो गयीं.. इस प्रकार महर्षि दधीचि और उनकी पत्नी का बलिदान हो गया किन्तु पीपल के कोटर में रखा बालक भूख प्यास से तड़प तड़प कर चिल्लाने लगा।जब कोई वस्तु नहीं मिली तो कोटर में गिरे पीपल के गोदों(फल) को खाकर बड़ा होने लगा। कालान्तर में पीपल के पत्तों और फलों को खाकर बालक का जीवन येन केन प्रकारेण सुरक्षित रहा।


एक दिन देवर्षि नारद वहाँ से गुजरे। नारद ने पीपल के कोटर में बालक को देखकर उसका परिचय पूंछा-



नारद - बालक तुम कौन हो ?


बालक - यही तो मैं भी जानना चाहता हूँ ।


नारद - तुम्हारे जनक कौन हैं ?


बालक - यही तो मैं जानना चाहता हूँ ।


तब नारद ने ध्यान धर देखा।नारद ने आश्चर्यचकित हो बताया कि -


हे बालक ! तुम महान दानी महर्षि दधीचि के पुत्र हो। तुम्हारे पिता की अस्थियों का वज्र बनाकर ही देवताओं ने असुरों पर विजय पायी थी। नारद ने बताया कि तुम्हारे पिता दधीचि की मृत्यु मात्र 31 वर्ष की वय में ही हो गयी थी।


बालक - मेरे पिता की अकाल मृत्यु का कारण क्या था ?


नारद - तुम्हारे पिता पर शनिदेव की महादशा थी।


बालक - मेरे ऊपर आयी विपत्ति का कारण क्या था ?


नारद - शनिदेव की महादशा।


इतना बताकर देवर्षि नारद ने पीपल के पत्तों और गोदों को खाकर जीने वाले बालक का नाम पिप्पलाद रखा और उसे दीक्षित किया।


नारद के जाने के बाद बालक पिप्पलाद ने नारद के बताए अनुसार ब्रह्मा जी की घोर तपस्या कर उन्हें प्रसन्न किया। ब्रह्मा जी ने जब बालक पिप्पलाद से वर मांगने को कहा तो पिप्पलाद ने अपनी दृष्टि मात्र से किसी भी वस्तु को जलाने की शक्ति माँगी। 


ब्रह्मा जी से वर् मिलने पर सर्वप्रथम पिप्पलाद ने शनिदेव का आह्वाहन कर अपने सम्मुख प्रस्तुत किया और सामने पाकर आँखे खोलकर भष्म करना शुरू कर दिया।



शनिदेव सशरीर जलने लगे। ब्रह्मांड में कोलाहल मच गया। सूर्यपुत्र शनि की रक्षा में सारे देव विफल हो गए। सूर्य भी अपनी आंखों के सामने अपने पुत्र को जलता हुआ देखकर ब्रह्मा जी से बचाने हेतु विनय करने लगे।अन्ततः ब्रह्मा जी स्वयम् पिप्पलाद के सम्मुख पधारे और शनिदेव को छोड़ने की बात कही किन्तु पिप्पलाद तैयार नहीं हुए।ब्रह्मा जी ने एक के बदले दो वर मांगने की बात कही। तब पिप्पलाद ने खुश होकर निम्नवत दो वरदान मांगे-


1 - जन्म से 5 वर्ष तक किसी भी बालक की कुंडली में शनि का स्थान नहीं होगा.. जिससे कोई और बालक मेरे जैसा अनाथ न हो।


2 - मुझ अनाथ को शरण पीपल वृक्ष ने दी है। अतः जो भी व्यक्ति सूर्योदय के पूर्व पीपल वृक्ष पर जल चढ़ाएगा उसपर शनि की महादशा का असर नहीं होगा।

 

ब्रह्मा जी ने तथास्तु कह वरदान दिया।तब पिप्पलाद ने जलते हुए शनि को अपने ब्रह्मदण्ड से उनके पैरों पर आघात करके उन्हें मुक्त कर दिया । जिससे शनिदेव के पैर क्षतिग्रस्त हो गए और वे पहले जैसी तेजी से चलने लायक नहीं रहे। अतः तभी से शनि "शनै:चरति य: शनैश्चर:" अर्थात जो धीरे चलता है वही शनैश्चर है, कहलाये और शनि आग में जलने के कारण काली काया वाले अंग भंग रूप में हो गए।


सम्प्रति शनि की काली मूर्ति और पीपल वृक्ष की पूजा का यही धार्मिक हेतु है। आगे चलकर पिप्पलाद ने प्रश्न उपनिषद की रचना की, जो आज भी ज्ञान का वृहद भंडार है.. 

Wednesday, July 6, 2022

अग्निपथ योजना I

 अग्निपथ योजना क्या है,,,

1:- उम्र 17 वर्ष 6 माह से 21 वर्ष

2:- योग्यता सीनियर सेकेंडरी

3:- पहले की तरह फिजिकल टेस्ट

4:- सेवा अवधि 4 वर्ष

5:- प्रशिक्षण अवधि 6 माह

6:- प्रथम वर्ष वेतन 30 हजार रुपये महीना जिसमें 9 हजार की कटौती होगी, मतलब 21 हजार प्रतिमाह मिलेंगे, 

द्वितीय वर्ष 33000 रुपये मिलेगे जिसमे 10000 रुपये प्रति माह कटौती होगी, 23 हजार प्रतिमाह मिलेंगे, 

तृतीय वर्ष 36000 हजार रुपये मिलेंगे, जिसमे 11000 कटौती होकर 25000 हजार रुपये प्रतिमाह मिलेंगे, 

चौथे वर्ष 40000 हजार रुपये प्रति माह मिलेंगे, जिसमे 12000 रुपये महीना कटेंगे, 28000 हजार रुपये प्रति माह मिलेंगे,


7:- 4 साल सेवा अवधि बार रिटायरमेंट पर सेवा निधि पैकेज बतोर 11 लाख 71 हजार रुपये मिलेंगे।


8:- 4 साल की सेवा अवधि उपरांत योग्यता मापदंडों के हिसाब से 25 % जवानों को स्थायी रूप से सेना में नियुक्ति दे दी जाएगी, बाकी 75 % जवानों को अग्निवीर कौशल प्रमाण पत्र दिया जाएगा, जिसके बेस पर प्राइवेट कम्पनियों में जॉब में प्राथमिकता मिलेगी, साथ ही खुद का व्यवसाय करने के लिए मिनिमम ब्याज दरों पर नॉन सिक्योर लोन दिलाया जाएगा।


9:-तीनों सेनाओं में प्रतिवर्ष 50000 हजार जवानो की भर्ती की जाएगी,!!


कुछ सेफ्टी डिपार्टमेंट को छोड़ दे तो, 22 , 23 वर्ष से तो बेरोजगार रोजगार के लिए अप्लाई करना शुरू करते है, जबकि अग्निपथ योजना में तो 18, 19 में  लगा बच्चा 22,23 में तो रिटायर ही हो जाएगा, मतलब बाद में वो अपने खर्चे पर अच्छी जॉब की तैयारी कर सकता है,बच्चे अक्सर 18, 20 ,22 की उम्र में ही गलत संगत में पड़कर भटक जाते है, जबकि इस उम्र में तो वो देश सेवा कर रहा होगा, फिजिकल फिट रहेगा, आर्थिक परेशानी नही होगी,

 भारत सरकार बहुत ही कारगर योजना लेकर आई है, ज्यादा से ज्यादा युवा फायदा उठाए,"!!

Monday, June 13, 2022

अजीनोमोटो: यह धीमा जहर है।

अजीनोमोटो::

सफेद रंग का चमकीला सा दिखने वाला मोनोसोडि़यम ग्लूटामेट यानी अजीनोमोटो, एक सोडियम साल्ट है। अगर आप चाइनीज़ डिश के दीवाने हैं तो यह आपको उसमें जरूर मिल जाएगा क्योंकि यह एक मसाले

के रूप में उनमें इस्तमाल किया जाता है। शायद ही आपको पता हो कि यह खाने का स्वाद बढ़ाने वाला मसाला वास्तव में जहर यह धीमा खाने का स्वाद नहीं बढ़ाता बल्कि हमारी स्वाद ग्रन्थियों के कार्य को दबा देता है जिससे हमें खाने के बुरे स्वाद का पता नहीं लगता। मूलतः इस का प्रयोग खाद्य की घटिया गुणवत्ता को छिपाने के लिए किया जाता है। यह सेहत के लिए भी बहुत खतरनाक होता है।
जान लें कि कैसे-
* सिर दर्द, पसीना आना और चक्कर आने जैसी खतरनाक बीमारी आपको अजीनोमोटो से हो सकती है। अगर आप इसके आदि हो चुके हैं और खाने में इसको बहुत प्रयोग करते हैं तो यह आपके दिमाग को भी नुकसान कर सकता है।



* इसको खाने से शरीर में पानी की कमी हो सकती है। चेहरे की सूजन और त्वचा में खिंचावमहसूस होना इसके कुछ साइड इफेक्ट हो सकते हैं।
* इसका ज्यादा प्रयोग से धीरे धीरे सीने में दर्द, सांस लेने में दिक्कत और आलस भी पैदा कर सकता है। इससे सर्दी-जुखाम और थकान भी महसूस होती है। इसमें पाये जाने वाले एसिड सामग्रियों की वजह से यह पेट और गले में जलन भी पैदा कर सकता है।
* पेट के निचले भाग में दर्द, उल्टी आना और डायरिया इसके आम दुष्प्रभावों में से एक हैं।
* अजीनोमोटो आपके पैरों की मासपेशियों और घुटनों में दर्द पैदा कर सकता है। यह हड्डियों को कमज़ोर और शरीर द्वारा जितना भी कैल्शिम लिया गया हो, उसे कम कर देता है।
* उच्च रक्तचाप की समस्या से घिरे लोगों को यह बिल्कुल नहीं खाना चाहिए क्योंकि इससे अचानक ब्लड प्रेशर बढ़ और घट जाता है।
* व्यक्तियों को इससे माइग्रेन होने की समस्या भी हो सकती है। आपके सिर में दर्द पैदा हो रहा है तो उसे तुरंत ही खाना बंद कर दें।
* अजीनोमोटो की उत्पादन प्रक्रिया भी विवादास्पद है : कहा जाता है कि इसका उत्पादन जानवरों के शरीर से प्राप्त सामग्री से भी किया जा सकता है।


*अजीनोमोटो बच्चों के लिए बहुत हानिकारक है। इसके कारण स्कूल
जाने वाले ज्यादातर बच्चे सिरदर्द के शिकार हो रहे हैं। भोजन में एमएसजी का इस्तेमाल या प्रतिदिन एमएसजी युक्त जंकफूड और प्रोसेस्ड फूड का असर बच्चों के शारीरिक और मानसिक विकास पर पड़ता है। कई शोधों में यह बात साबित हो चुकी है कि एमएसजी युक्त डाइट बच्चों में मोटापे की समस्या का एक कारण है। इसके अलावा यह बच्चों को भोजन के प्रति अंतिसंवेदनशील बना सकता है। मसलन, एमएसजी युक्त भोजन अधिक खाने के बाद हो सकता है कि बच्चे को किसी दूसरी डाइट से एलर्जी हो जाए। इसके अलावा, यह बच्चों के व्यवहार से संबंधित समस्याओं का भी एक कारण है। छिपा हो सकता है अजीनोमोटो अब पूरी दुनिया में मैगी नूडल बच्चे बड़े सभी चाव से खाते हैं, इस मैगी में जो राज की बात है वो है Hydrolyzed groundnut protein और स्वाद वर्धक 635 Disodium ribonucleotides यह कम्पनी यह दावा करती है कि इसमें अजीनोमोटो यानि MSG नहीं डाला गया है। जबकि Hydrolyzed groundnut protein पकने के बाद अजीनोमोटो यानि MSG में बदल जाता है और Disodium ribonucleotides इसमें मदद करता है।

#RajBisht

Wednesday, June 1, 2022

महाराजा विक्रमादित्य के नवरत्न

 अकबर के नौरत्नों से इतिहास भर दिया पर महाराजा विक्रमादित्य के नवरत्नों की कोई चर्चा पाठ्यपुस्तकों में नहीं है। जबकि सत्य यह है कि अकबर को महान सिद्ध करने के लिए महाराजा विक्रमादित्य की नकल करके कुछ धूर्तों ने इतिहास में लिख दिया कि अकबर के भी नौ रत्न थे ।

राजा विक्रमादित्य के नवरत्नों को जानने का प्रयास करते हैं।

राजा विक्रमादित्य के दरबार में मौजूद नवरत्नों में उच्च कोटि के कवि, विद्वान, गायक और गणित के प्रकांड पंडित शामिल थे, जिनकी योग्यता का डंका देश-विदेश में बजता था। चलिए जानते हैं कौन थे।
ये हैं नवरत्न –
1–धन्वंतरि -


नवरत्नों में इनका स्थान गिनाया गया है। इनके रचित नौ ग्रंथ पाये जाते हैं। वे सभी आयुर्वेद चिकित्सा शास्त्र से सम्बन्धित हैं। चिकित्सा में ये बड़े सिद्धहस्त थे। आज भी किसी वैद्य की प्रशंसा करनी हो तो उसकी ‘धन्वन्तरि’ से उपमा दी जाती है।
2– क्षपणक


जैसा कि इनके नाम से प्रतीत होता है, ये बौद्ध संन्यासी थे।
इससे एक बात यह भी सिद्ध होती है कि प्राचीन काल में मन्त्रित्व आजीविका का साधन नहीं था अपितु जनकल्याण की भावना से मन्त्रिपरिषद का गठन किया जाता था। यही कारण है कि संन्यासी भी मन्त्रिमण्डल के सदस्य होते थे।
इन्होंने कुछ ग्रंथ लिखे जिनमें ‘भिक्षाटन’ और ‘नानार्थकोश’ ही उपलब्ध बताये जाते हैं।
3–अमरसिंह


ये प्रकाण्ड विद्वान थे। बोध-गया के वर्तमान बुद्ध-मन्दिर से प्राप्य एक शिलालेख के आधार पर इनको उस मन्दिर का निर्माता कहा जाता है। उनके अनेक ग्रन्थों में एक मात्र ‘अमरकोश’ ग्रन्थ ऐसा है कि उसके आधार पर उनका यश अखण्ड है। संस्कृतज्ञों में एक उक्ति चरितार्थ है जिसका अर्थ है ‘अष्टाध्यायी’ पण्डितों की माता है और ‘अमरकोश’ पण्डितों का पिता। अर्थात् यदि कोई इन दोनों ग्रंथों को पढ़ ले तो वह महान् पण्डित बन जाता है।
4–शंकु


इनका पूरा नाम ‘शङ्कुक’ है। इनका एक ही काव्य-ग्रन्थ ‘भुवनाभ्युदयम्’ बहुत प्रसिद्ध रहा है। किन्तु आज वह भी पुरातत्व का विषय बना हुआ है। इनको संस्कृत का प्रकाण्ड विद्वान् माना गया है।
5– वेतालभट्ट


विक्रम और वेताल की कहानी जगतप्रसिद्ध है। ‘वेताल पंचविंशति’ के रचयिता यही थे, किन्तु कहीं भी इनका नाम देखने सुनने को अब नहीं मिलता। ‘वेताल-पच्चीसी’ से ही यह सिद्ध होता है कि सम्राट विक्रम के वर्चस्व से वेतालभट्ट कितने प्रभावित थे। यही इनकी एक मात्र रचना उपलब्ध है।
6– घटखर्पर


जो संस्कृत जानते हैं वे समझ सकते हैं कि ‘घटखर्पर’ किसी व्यक्ति का नाम नहीं हो सकता। इनका भी वास्तविक नाम यह नहीं है। मान्यता है कि इनकी प्रतिज्ञा थी कि जो कवि अनुप्रास और यमक में इनको पराजित कर देगा उनके यहां वे फूटे घड़े से पानी भरेंगे। बस तब से ही इनका नाम ‘घटखर्पर’ प्रसिद्ध हो गया और वास्तविक नाम लुप्त हो गया।
इनकी रचना का नाम भी ‘घटखर्पर काव्यम्’ ही है। यमक और अनुप्रास का वह अनुपमेय ग्रन्थ है।
इनका एक अन्य ग्रन्थ ‘नीतिसार’ के नाम से भी प्राप्त होता है।
7– कालिदास


ऐसा माना जाता है कि कालिदास सम्राट विक्रमादित्य के प्राणप्रिय कवि थे। उन्होंने भी अपने ग्रन्थों में विक्रम के व्यक्तित्व का उज्जवल स्वरूप निरूपित किया है। कालिदास की कथा विचित्र है। कहा जाता है कि उनको देवी ‘काली’ की कृपा से विद्या प्राप्त हुई थी। इसीलिए इनका नाम ‘कालिदास’ पड़ गया। संस्कृत व्याकरण की दृष्टि से यह कालीदास होना चाहिए था किन्तु अपवाद रूप में कालिदास की प्रतिभा को देखकर इसमें उसी प्रकार परिवर्तन नहीं किया गया जिस प्रकार कि ‘विश्वामित्र’ को उसी रूप में रखा गया।
जो हो, कालिदास की विद्वता और काव्य प्रतिभा के विषय में अब दो मत नहीं है। वे न केवल अपने समय के अप्रितम साहित्यकार थे अपितु आज तक भी कोई उन जैसा अप्रितम साहित्यकार उत्पन्न नहीं हुआ है। उनके चार काव्य और तीन नाटक प्रसिद्ध हैं। शकुन्तला उनकी अन्यतम कृति मानी जाती है।
8–वराहमिहिर

भारतीय ज्योतिष-शास्त्र इनसे गौरवास्पद हो गया है। इन्होंने अनेक ग्रन्थों का प्रणयन किया है। इनमें-‘बृहज्जातक‘, सुर्यसिद्धांत, ‘बृहस्पति संहिता’, ‘पंचसिद्धान्ती’ मुख्य हैं। गणक तरंगिणी’, ‘लघु-जातक’, ‘समास संहिता’, ‘विवाह पटल’, ‘योग यात्रा’, आदि-आदि का भी इनके नाम से उल्लेख पाया जाता है।
9– वररुचि


कालिदास की भांति ही वररुचि भी अन्यतम काव्यकर्ताओं में गिने जाते हैं। ‘सदुक्तिकर्णामृत’, ‘सुभाषितावलि’ तथा ‘शार्ङ्धर संहिता’, इनकी रचनाओं में गिनी जाती हैं।
इनके नाम पर मतभेद है। क्योंकि इस नाम के तीन व्यक्ति हुए हैं उनमें से-
1.पाणिनीय व्याकरण के वार्तिककार-वररुचि कात्यायन,
2.‘प्राकृत प्रकाश के प्रणेता-वररुचि
3.सूक्ति ग्रन्थों में प्राप्त कवि-वररुचि
आपको पता है ऐसे नवरत्न अब क्यों नहीं पैदा होते क्योंकि वेदों के ऊपर रिसर्च नहीं होता धर्म ग्रंथों को पढ़ाया नहीं जाता और धर्म ग्रंथों के ज्ञान को सिर्फ एक समाज के फायदे से जोड़ दिया और धर्म ग्रंथ के ज्ञान को पूजा-पाठ तक ही सीमित रख दिया मगर आप सच्चाई जानते हैं हमारे धर्म ग्रंथों का ज्ञान किसी भी विज्ञान गणित साइंस से भी आगे है ऋषि परंपरा गुरुकुल की बहुत आवश्यकता है अकबर के नौरत्नों से इतिहास भर दिया पर महाराजा विक्रमादित्य के नवरत्नों की कोई चर्चा पाठ्यपुस्तकों में नहीं है। जबकि सत्य यह है कि अकबर को महान सिद्ध करने के लिए महाराजा विक्रमादित्य की नकल करके कुछ धूर्तों ने इतिहास में लिख दिया कि अकबर के भी नौ रत्न थे ।

Saturday, April 9, 2022

बुजुर्गों की देखभाल को बनाए समाज का आयना

 बुजुर्गों की देखभाल को बनाए समाज का आयना 

भारत सरकार के समाज कल्याण मंत्रालय के द्वारा ग्रामीण क्षेत्र विकास समिति देहरादून के माध्यम से

वृद्ध लोगों की देखभाल हेतू एक दिवसीय प्रशिक्षण युवा कल्याण निदेशालय मे चलाया गया।



इस अवसर पर कार्यक्रम का उद्धघाटन जिला युवा कल्याण अधिकारी प्रकाश चंद्र सती सेवा निवृत्त आर के पंत संस्था अध्यक्ष सुशील बहुगुणा ने किया। इस अवसर पर वक्ताओं ने कहा कि

बुज्रगों को भी बच्चे की तरह देखभाल की आवश्यकता है।



 कहा गया भारत में, लगभग 120 मिलियन बुजुर्ग लोग विभिन्न शारीरिक, मनोसामाजिक, आर्थिक और आध्यात्मिक समस्याओं से पीड़ित हैं।  जबकि कार्यात्मक और संज्ञानात्मक रूप से फिट बुजुर्ग सामान्य स्वास्थ्य देखभाल सुविधाओं तक पहुंच सकते हैं, इन लोगों को स्वतंत्र रखने के लिए सक्रिय उम्र बढ़ने के कार्यक्रम की आवश्यकता होती है।  यहीं पर जराचिकित्सा देखभाल काम आती है।




इस प्रशिक्षण मे जेरियाट्रिक्स या जेरियाट्रिक मेडिसिन एक विशेषता है जो बुजुर्ग लोगों के लिए स्वास्थ्य देखभाल में सुधार पर आधारित है।  यह अक्सर उम्र बढ़ने के साथ आने वाली बीमारी और विकलांगता को रोकने और उसका इलाज करके वृद्ध वयस्कों में स्वस्थ सुधार का समर्थन करता है।  वृद्धावस्था नर्सिंग वृद्ध वयस्कों को उनके घर, अस्पताल या विशेष संस्थानों जैसे नर्सिंग होम, मनोरोग संस्थान आदि में खानपान सहायता शामिल है

कार्यक्रम मे  सुशील डोभाल, राजेन्द्र fc’V vkSj  सौरभ cMksuh वृद्धा अवस्था से जुड़े कार्यकर्ता उपस्थित Fks


#राज बिष्ट 

Tuesday, December 14, 2021

सुंदरता के उपाय

 1. दूध की मलाई और बारीक पिसी हुई मिश्री को एक साथ मिलाएं और इसका सेवन नियमित रूप से करें। ऐसा करने पर कमजोरी दूर होती है और शरीर बलवान होता है। चेहरे पर रौनक बनी रहती है।



2. यदि आपकी त्वचा रूखी और बेजान दिखाई देती है तो ये नुस्खा अपनाएं। जौ का आटा, हल्दी, सरसो का तेल पानी में मिलाकर उबटन बनाएं। इस उबटन को चेहरे पर लगाएं और कुछ समय बाद साफ पानी से चेहरा धो लें। इस प्रकार नियमित रूप से करते रहे। आपका चेहरा चमकने लगेगा।



3. यदि सर्दी, खांसी और बुखार से पीड़ित हैं तो नाक में 2 बूंद सरसों का तेल डालें और दूध में हल्दी मिलाकर पिएं, इससे शीघ्र आराम मिलता है।

4. कमजोरी के दूर करने के लिए यह उपाय करें। सफेद मूसली या धोली मूसली का चूर्ण बनाएं। यह चूर्ण एक चम्मच और एक चम्मच पिसी मिश्री मिलाएं। सुबह उठने के बाद और रात को सोने से पहले गुनगुने दूध के साथ पीएं। ऐसा करने पर कमजोरी दूर हो जाती है।


5. नारियल के तेल में नींबू का रस मिलाकर बालों में लगाएं, इससे रूसी एवं खुश्की से छुटकारा मिलता है।


6. रोज सुबह नींबू और शहद को गुनगुने पानी में डालकर पीएं। इससे शरीर का अतिरिक्त फैट कम हो जाता है।


7. आंवले का मुरब्बा का सेवन नियमित रूप से करते रहेंगे तो सभी प्रकार की कमजोरी दूर हो जाएगी।


8. गैस की समस्या हो तो यह नुस्खा अपनाएं। अजवाइन और जीरा समान मात्रा में एक साथ भून लें। इसके बाद इस मिश्रण को पानी में उबाल कर छान लें और छने हुए पानी में चीनी मिलाकर पिएं। ऐसा करने पर एसिडिटी से राहत मिलती है



#राज

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