Showing posts with label Tpoint. Show all posts
Showing posts with label Tpoint. Show all posts

Thursday, March 28, 2024

केजरीवाल का जेल जाना बीजेपी को फायदा या नुकसान?

 केजरीवाल का जेल जाना बीजेपी को फायदा या नुकसान?

 केजरीवाल का जेल जाना बीजेपी को फायदा या नुकसान?

   

केजरीवाल का जेल जाना बीजेपी को फायदा या नुकसान?

अरविंद केजरीवाल, दिल्ली के मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी (आप) के नेता का जेल जाना,  इसमे बीजेपी को कुछ फ़ायदा और नुक्सान दोनो हो सकते हैं।

फायदे की बात करें तो, बीजेपी उनकी छवि को कमजोर कर सकती है, क्योंकि केजरीवाल की गिरफ्तारी से उनका समर्थन आधार, जो कि दिल्ली में काफी मजबूत है, उनके साथ और भी न्याय कर सकता है। इसके अलावा,  केजरीवाल को जेल भेज कर उनकी राजनीतिक विश्वसनीयता कम करने का भरपूर प्रयास करेगी, जिससे केजरीवाल की  राजनीतिक स्थिति कमजोर् हो सकती है।

नुकसान की तरफ ध्यान दें तो, केजरीवाल की गिरफ्तारी उनकी छवि को स्थिर नुकसान पहुंचा सकती है और उनके समर्थकों में भी इज्जत और सहानुभूति का भाव बढ़ सकता है। इसके अलावा, अगर केजरीवाल को बिना सही सबूत के गिरफ्तार किया गया है, तो इस तरह उनके समर्थकों में बीजेपी का विरोध और विरोध बढ़ सकता है, जो उनके लिए नुक्सानदायक हो सकता है।

अंत में, केजरीवाल की गिरफ्तारी के लिए बीजेपी के लिए एक जोखिम भरा कदम हो सकता है, जिसके फायदे और नुक्सान दोनों हो सकते हैं, और इसका असर चुनाव के नतीजे आने पर ही मालूम होगा की बीजेपी को इससे फायदा हुआ या नुकसान।

Thursday, November 17, 2022

पलेठी सूर्य मंदिर की किसी को सुध नहीं ख़त्म हो रही है महान विरासत



सूर्य मंदिर का नाम सुनते ही हमारे सामने कोणार्क के सूर्य मंदिर की छवि बन जाती है, पर ऐसे ही दो सूर्य मंदिर और हैं जिनमे से एक कटारमल अल्मोड़ा में स्तिथ है तथा दूसरा पलेठी टिहरी गढ़वाल में।और मैं जिस सूर्य मंदिर के बारे में लिख रहा हूँ वो है टिहरी गढ़वाल की देवप्रयाग तहसील के ब्लॉक हिंडोलाखाल से 10 किलोमीटर की दूरी पर पलेठी गांव में स्तिथ ।



यह एक प्राचीन सूर्य मंदिर। मान्यता अनुसार 7वीं-8 वीं शताब्दी की प्राचीन अवधि से संबंधित गढ़वाल में हिंडोलाखाल से 10 किमी दूर यह सूर्य मंदिर, लुलेरा गुलेरा घाटी में स्थित हैं। अगर हम स्थानीय लोगों पर विश्वास करते हैं, तो ग्रामीणों द्वारा खुदाई में मंदिरों का एक समूह मिला था। जिनमे एक यह सूर्य मंदिर तथा एक शिव मंदिर प्राप्त हुए थे। भारत मे कोणार्क और कटारमल के अलावा तीसरा सूर्य मंदिर यंही स्तिथ है। इस सूर्य मंदिर के पत्थरों पर कौन सी लिपि में लिखा गया है ये आज भी एक चर्चा और खोज का विषय है। कुछ पत्थरों पर पाया गया है कि इनपर ब्राह्मी लिपि में लिखा गया है पर कुछ पर अभी स्तिथि स्पष्ट नही है भारतीय पुरातत्व विभाग के डॉ एसएन घई और डॉ के.वी. रमेश, ने 22 अक्टूबर 1968 को मंदिर के शिलालेखों का अध्ययन किया। महाराजाधिरराज परमेश्वर कल्याण वर्मन का नाम ब्रह्मी में संरचना पर एक प्रमुख उल्लेख पाया गया है। कुछ इतिहासकारों के अनुसार, सूर्य मंदिर 7वीं -8वीं शताब्दी के दौरान बनाए गए थे जब यह क्षेत्र ब्रह्मपुर के वरमानों के शासनकाल में था। अपने आप मे कई अनोखे राज समेटे यह सूर्य मंदिर पर्यटन और आध्यात्मिक दृष्टि से कई बड़ी संभावनाएं समेटे हुए है। इस मंदिर का डिजाइन अपने आप मे अलग और दुर्लभ है। आद्यात्मिकता और पर्यटन को साथ संजोने की दृष्टि से ये भारत की कुछ चुनिन्दा जगहों में से एक है।





पलेठी में सूर्य मंदिर इस अर्थ में विशेष हैं कि ये दक्षिण भारतीय परंपरा से अलग है। इस सूर्य मंदिर के पास में एक और मंदिर स्तिथ है जो भगवान भोलेनाथ का मंदिर है जो श्री चमनेश्वर महादेव के नाम से विख्यात है। दोनों मंदिर संस्कृतिक विरासत को संभाले हुए है किंतु सरकार और सरकारी मशीनरी के ढीले रवैये के कारण ये आज जिस जर्जर स्तिथि में है उसे गांव ही नही अपितु पूरे क्षेत्र के लोगो मे निराशा की भावना है उचित रखरखाव की कमी के कारण यह सूर्य मंदिर विलुप्त होने के कगार पर है। प्राचीन संरचनाएं जिनमें पुरातात्विक महत्व है, वे उचित रखरखावों न होने के कारण बर्बाद हो रहे हैं। आज इस मंदिर के पास में सड़क पहुंच गई है जिससे यंहा पहुंचना बहुत आसान हो गया है और इसके पुनः जीर्णोद्धार के लिए ज्यादा मेहनत की भी जरूरत नही पड़ेगी पर कोई भी सरकार या जिला प्रशासन इसकी सुध नही लेता है। अगर प्रशासन और सरकार इसपर ध्यान देते हैं तो भविष्य में हमारी इस महान धरोहर को एक बडे पर्यटन क्षेत्र के रूप में देखा जा सकता है। बस जरूरत है एक पहल की।

#राजबिष्ट


Wednesday, November 16, 2022

धर्मांतरण का कानून होगा सख्त। 10 साल की सजाI

 मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी मंत्रिमंडल की बैठक बुधवार को राज्य सचिवालय में हुई।


 

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में 26 मामले सामने आए। जिसमें एक मामले को छोड़कर सभी 25 प्रस्ताव पास किए गए। 

इस दौरान धर्मांतरण का कानून सख्त करने का फैसला हुआ। अब उत्तराखंड में धर्मांतरण कानून गैर जमानती हुआ। इसमें 10 साल की सजा होगी।धामी कैबिनेट में 25 अहम प्रस्तावों पर मुहर लगी। इस दौरान नैनीताल हाईकोर्ट को शिफ्ट करने को लेकर बड़ा फैसला हुआ। बैठक में नैनीताल हाईकोर्ट को हल्द्वानी में शिफ्ट करने की सैद्धांतिक मंजूर दी गई। बता दें, नैनीताल हाईकोर्ट को शिफ्ट करने की लंबे समय से मांग चल रही थी।



धर्मांतरण का कानून होगा सख्त। 10 साल की सजा

नैनीताल हाईकोर्ट हल्द्वानी शिफ्ट करने पर सैद्धांतिक मंजूरी।

पशुपालकों को महंगे भूसे से राहत, सरकार ने सब्सिडी बढ़ाई।

भूसे और साइलेज पर बढ़ी सब्सिडी।

कौशल विकास केंद्र संचालको को भुगतान के बदले नियम।

अब तीन नहीं चार किश्तों में मिलेगा संचालकों को प्रशिक्षण का भुगतान।

सहकारिता की तर्ज पर दुग्ध विकास विभाग भी देगा 75 फीसदी सब्सिडी। अभी तक 50 फीसदी थी।

दुग्ध सहकारी समितियों से जुड़े 52 हजार पशुपालकों को मिलेगा लाभ। 

प्रयास करने वालो का भगवान भी साथ देते की हैं ।

 बहुत समय पहले की बात है , किसी गाँव में एक किसान रहता था . उसके पास बहुत सारे जानवर थे , उन्ही में से

एक गधा भी था . एक दिन वह चरते चरते खेत में बने एक पुराने सूखे हुए कुएं के पास जा पहुचा और अचानक ही उसमे फिसल कर गिर गया . गिरते ही उसने जो...र -जोर से चिल्लाना शुरू किया -” ढेंचू-ढेंचू ….ढेंचू-ढेंचू ….”

उसकी आवाज़ सुन कर खेत में काम कर रहे लोग कुएं के पास पहुचे, किसान को भी बुलाया गया .

किसान ने स्थिति का जायजा लिया , उसे गधे पर दया तो आई लेकिन उसने मन में सोचा कि इस बूढ़े गधे को बचाने से कोई लाभ नहीं है और इसमें मेहनत भी बहुत लगेगी और साथ ही कुएं की भी कोई ज़रुरत नहीं है , फिर उसने बाकी लोगों से कहा , “मुझे नहीं लगता कि हम किसी भी तरह इस गधे को बचा सकते हैं अतः आप सभी अपने-अपने काम पर लग जाइए, यहाँ समय गंवाने से कोई लाभ नहीं.”

और ऐसा कह कर वह आगे बढ़ने को ही था की एक मजदूर बोला, ” मालिक , इस गधे ने सालों तक आपकी सेवा की है , इसे इस तरह तड़प-तड़प के मरने देने से अच्छा होगा की हम उसे इसी कुएं में दफना दें .”

किसान ने भी सहमती जताते हुए उसकी हाँ में हाँ मिला दी.

” चलो हम सब मिल कर इस कुएं में मिटटी डालना शुरू करते हैं और गधे को यहीं दफना देते हैं”, किसान बोला.

गधा ये सब सुन रहा था और अब वह और भी डर गया , उसे लगा कि कहाँ उसके मालिक को उसे बचाना चाहिए तो उलटे वो लोग उसे दफनाने की योजना बना रहे हैं . यह सब सुन कर वह भयभीत हो गया , पर उसने हिम्मत नहीं हारी और भगवान् को याद कर वहां से निकलने के बारे में सोचने लगा ….

अभी वह अपने विचारों में खोया ही था कि अचानक उसके ऊपर मिटटी की बारिश होने लगी, गधे ने मन ही मन सोचा कि भले कुछ हो जाए वह अपना प्रयास नहीं छोड़ेगा और

आसानी से हार नहीं मानेगा। और फिर वह पूरी ताकत से उछाल मारने लगा .

किसान ने भी औरों की तरह मिटटी से भरी एक बोरी कुएं में झोंक दी और उसमे झाँकने लगा , उसने देखा की जैसे ही मिटटी गधे के ऊपर पड़ती वो उसे अपने शरीर से झटकता और उछल कर उसके ऊपर चढ़ जाता .जब भी उसपे मिटटी डाली जाती वह यही करता ….झटकता और ऊपर चढ़ जाता …. झटकता और ऊपर चढ़ जाता ….

किसान भी समझ चुका था कि अगर वह यूँ ही मिटटी डलवाता रहा तो गधे की जान बच सकती है .



फिर क्या था वह मिटटी डलवाता गया और देखते-देखते गधा कुएं के मुहाने तक पहुँच गया, और अंत में कूद कर बाहर आ गया.

मित्रों, हमारी ज़िन्दगी भी इसी तरह होती है , हम चाहे जितनी भी सावधानी बरतें कभी न कभी मुसीबत रुपी गड्ढे में गिर ही जाते हैं .पर गिरना प्रमुख नहीं है, प्रमुख है संभलना . बहुत से लोग बिना प्रयास किये ही हार मान लेते हैं , पर जो प्रयास करते हैं भगवान् भी किसी न किसी रूप में उनके लिए मदद भेज देता है।

Tuesday, November 15, 2022

हटाए गये विधानसभा कर्मचारियों की नहीं होगी बहाली

 विधानसभा के हटाए गए कर्मचारियों की बहाली नैनीताल हाईकोर्ट के ऑर्डर के बाद भी नहीं हो पाई है। विधानसभा अध्यक्ष ऋतु खंडूड़ी ने कहा कि इन कर्मचारियों को लेकर विधिक राय ली जा रही है और उसके बाद ही इनके संदर्भ में निर्णय लिया जाएगा। विधानसभा अध्यक्ष ऋतु खंडूड़ी ने 2016 के बाद विधानसभा में हुई भर्तियों को निरस्त करते हुए 250 कर्मचारियों को हटा दिया था।

कर्मचारी इस फैसले के खिलाफ कोर्ट गए तो नैनीताल हाईकोर्ट ने 15 अक्तूबर को स्पीकर के फैसले पर स्टे दे दिया। 



कर्मचारी वापस ज्वाइनिंग के लिए आए तो विधानसभा सचिवालय ने कर्मचारियों को रिसीविंग तो दी लेकिन उन्हें अग्रिम निर्देशों तक कार्यालय न आने को कह दिया।


आप अपनी राय जरूर दे



Sunday, November 13, 2022

हरचण लैगी भाषा निचन्त होण लैगी संस्कृति। (खोने लगी भाषा खत्म होने लगी संस्कृति)

  

हरचण लैगी भाषा निचन्त होण लैगी संस्कृति।

(खोने लगी भाषा खत्म होने लगी संस्कृति)

जी हाँ ये एक पंक्ति ही अपने आप मे सबकुछ कह जाती है। आज उत्तराखंड की विलुप्त होती गढ़वाली और कुमाउनी भाषा उत्तराखंड की संस्कृति को भी विलुप्ति की दिशा में ले जा रही हैं।

 किसी भी संस्कृती की पहचान वहां की भाषा, वहां की वेशभूषा होती है। गढ़वाली और कुमाउनी उत्तराखण्ड की प्रमुख बोली जाने वाली दो भाषाएँ हैं किंतु आज ये दोनों भाषाएँ विलुप्ति की दिशा में अग्रसर हैं। आज की इस भागती दौड़ती जिंदगी में रोजगार और शिक्षा के अलावा भी अन्य कई कारणों से उत्तराखण्ड के पहाड़ी क्षेत्रों से पलायन अपने चरम पर है, जिस कारण से लोगो को पहाड़ो से शहरों की तरफ भागना पड़ रहा है। लोग पहाड़ो से शहर में आकर वहीं बस जाते हैं और वहां की वेशभूषा वहां की भाषा को ही अपना लेते हैं और यहां तक कि उनके बच्चों को अपनी मूल भाषा का ज्ञान भी नही होता है। इसी कतार में कुछ लोग वो भी हैं जो दिखावटीपन के लिए भी अपनी मूल भाषा नही बोलते हैं। और कुछ लोगों को अपनी भाषा को बोलने में शर्म भी आती है। इसी तरह से गढ़वाली और कुमाउनी भाषा बोलने वालों की संख्या में हर साल कमी आ रही है और इस कमी के कारण उत्तराखण्ड की महान विरासत हमारी महान संस्कृति धीरे-धीरे विलुप्त होती जा रही है। 

पुराने वक़्त में कौथिक (थौल), सामूहिक नृत्य, सामूहिक गान इस तरह से कई अन्य आयोजन हमारी भाषा और संस्कृति को संजोकर रखते थे और लोगो के बीच मे प्रेमभाव बनाये रखने में बेजोड़ थे। किंतु आज दो गढ़वाली आपस मे गढ़वाली में और दो कुमाउनी आपस मे कुमाउनी में बात नही करते। दूसरी भाषाओं को बोलने की होड़ लगी हुई है । अपनी भाषा में बात करने में शर्म महशूश करते हैं। जबकि हमें अपनी भाषा और संस्कृति को बढ़ावा देना चाहिए।

हमारे अपने इस तरह के लोग हैं जो अपनी भाषा और अपनी संस्कृति को भूलते जा रहे हैं।

उनकी तुलना में कुछ लोग अभी ऐसे भी हैं जो आज भी देश या विदेशों में रहकर अपनी गढ़वाली या कुमाउनी भाषा को खुद भी बोलते हैं और अपने बच्चों को भी सिखाते हैं। यहां तक वो अपनी संस्कृति को अपने और अपने बच्चों के माध्यम से पूरे देश ही नही विदेश में भी प्रचार करते हैं।कई लोग इस दिशा में कार्य कर रहे हैं।

मेरा यह लेख किसी भी भाषा के खिलाफ नही है किंतु मैं ये कहना चाहता हूं कि आप अपने बच्चों को सब तरीके की भाषा सिखाऐं किन्तु अपनी गढवाली या कुमाउनी भाषा को सीखाना बिल्कुल न भूलें। अपनी भाषा को बचाये रखें अपनी संस्कृति बची रहेगी।

हो सके तो अपने गावों में कुछ पारम्परिक रीति रिवाजों को फिर साथ मिलकर सामूहिक रूप से मनाएं। अपनी भाषा अपनी संस्कृति के मेल मिलाप को संजोकर रखें।

क्योंकिं इतिहास गवाह है जिनकी भाषा खोई संस्कृति खोई उनका फिर नामो निशान भी मिट गया।

आप जहां भी रहें किन्तु अपनी गढवाली और कुमाउनी भाषा के साथ - साथ अपनी संस्कृति को बनाये रखें बचाये रखें। अपनी मातृभाषा को बोलने में न हिचकें और न शर्म करें। अपनी भाषा अपनी संस्कृति पर गर्व करें। आज के इस आधुनिक युग मे हमे टेक्नोलॉजी और अपनी सांस्कृतिक धरोहर अपनी भाषा को साथ लेकर चलना होगा ।

त आवा अपणी भाषा अपणी संस्कृति तैं बाचौण का खातिर आज संकल्प करदा कि अपणी भाषा बोलला और अपणी संस्कृति तै दुनिया मा फैलोला।

(तो आओ आज अपनी भाषा और संस्कृति बचाने के लिए आज संकल्प करते हैं कि अपनी भाषा बोलेंगे और अपनी अपनी संस्कृति को दुनिया तक फैलाएंगे)

#राज बिष्ट


जब रावण को मंदोदरी ने कहा राम का अवतार धारण कर लो।

 रावण सीता को समझा समझा कर

हार

गया था पर

सीता ने रावण की तरफ

एक बार देखा तक नहीं, तब

मंदोदरी ने

उपाय बताया कि तुम राम बन के

सीता के

पास जाओ वो तुम्हे जरूर देखेगी।



रावण ने कहा - मैं ऐसा कई बार कर

चुका हू

मंदोदरी - तब क्या सीता ने

आपकी ओर देखा

रावण - "मैं खुद सीता को नहीं देख

सका...क्योंकि मैं जब-जब राम बनता हूँ

मुझे

परायी नारी

अपनी माता और

अपनी पुत्री सी दिखती है

----।"

अपने अंदर राम को ढूंढे,

और उनके चरित्र पर चलिए ।

आपसे भूलकर भी

भूल नहीं होगी ।।

Wednesday, July 6, 2022

अग्निपथ योजना I

 अग्निपथ योजना क्या है,,,

1:- उम्र 17 वर्ष 6 माह से 21 वर्ष

2:- योग्यता सीनियर सेकेंडरी

3:- पहले की तरह फिजिकल टेस्ट

4:- सेवा अवधि 4 वर्ष

5:- प्रशिक्षण अवधि 6 माह

6:- प्रथम वर्ष वेतन 30 हजार रुपये महीना जिसमें 9 हजार की कटौती होगी, मतलब 21 हजार प्रतिमाह मिलेंगे, 

द्वितीय वर्ष 33000 रुपये मिलेगे जिसमे 10000 रुपये प्रति माह कटौती होगी, 23 हजार प्रतिमाह मिलेंगे, 

तृतीय वर्ष 36000 हजार रुपये मिलेंगे, जिसमे 11000 कटौती होकर 25000 हजार रुपये प्रतिमाह मिलेंगे, 

चौथे वर्ष 40000 हजार रुपये प्रति माह मिलेंगे, जिसमे 12000 रुपये महीना कटेंगे, 28000 हजार रुपये प्रति माह मिलेंगे,


7:- 4 साल सेवा अवधि बार रिटायरमेंट पर सेवा निधि पैकेज बतोर 11 लाख 71 हजार रुपये मिलेंगे।


8:- 4 साल की सेवा अवधि उपरांत योग्यता मापदंडों के हिसाब से 25 % जवानों को स्थायी रूप से सेना में नियुक्ति दे दी जाएगी, बाकी 75 % जवानों को अग्निवीर कौशल प्रमाण पत्र दिया जाएगा, जिसके बेस पर प्राइवेट कम्पनियों में जॉब में प्राथमिकता मिलेगी, साथ ही खुद का व्यवसाय करने के लिए मिनिमम ब्याज दरों पर नॉन सिक्योर लोन दिलाया जाएगा।


9:-तीनों सेनाओं में प्रतिवर्ष 50000 हजार जवानो की भर्ती की जाएगी,!!


कुछ सेफ्टी डिपार्टमेंट को छोड़ दे तो, 22 , 23 वर्ष से तो बेरोजगार रोजगार के लिए अप्लाई करना शुरू करते है, जबकि अग्निपथ योजना में तो 18, 19 में  लगा बच्चा 22,23 में तो रिटायर ही हो जाएगा, मतलब बाद में वो अपने खर्चे पर अच्छी जॉब की तैयारी कर सकता है,बच्चे अक्सर 18, 20 ,22 की उम्र में ही गलत संगत में पड़कर भटक जाते है, जबकि इस उम्र में तो वो देश सेवा कर रहा होगा, फिजिकल फिट रहेगा, आर्थिक परेशानी नही होगी,

 भारत सरकार बहुत ही कारगर योजना लेकर आई है, ज्यादा से ज्यादा युवा फायदा उठाए,"!!

Monday, June 13, 2022

अजीनोमोटो: यह धीमा जहर है।

अजीनोमोटो::

सफेद रंग का चमकीला सा दिखने वाला मोनोसोडि़यम ग्लूटामेट यानी अजीनोमोटो, एक सोडियम साल्ट है। अगर आप चाइनीज़ डिश के दीवाने हैं तो यह आपको उसमें जरूर मिल जाएगा क्योंकि यह एक मसाले

के रूप में उनमें इस्तमाल किया जाता है। शायद ही आपको पता हो कि यह खाने का स्वाद बढ़ाने वाला मसाला वास्तव में जहर यह धीमा खाने का स्वाद नहीं बढ़ाता बल्कि हमारी स्वाद ग्रन्थियों के कार्य को दबा देता है जिससे हमें खाने के बुरे स्वाद का पता नहीं लगता। मूलतः इस का प्रयोग खाद्य की घटिया गुणवत्ता को छिपाने के लिए किया जाता है। यह सेहत के लिए भी बहुत खतरनाक होता है।
जान लें कि कैसे-
* सिर दर्द, पसीना आना और चक्कर आने जैसी खतरनाक बीमारी आपको अजीनोमोटो से हो सकती है। अगर आप इसके आदि हो चुके हैं और खाने में इसको बहुत प्रयोग करते हैं तो यह आपके दिमाग को भी नुकसान कर सकता है।



* इसको खाने से शरीर में पानी की कमी हो सकती है। चेहरे की सूजन और त्वचा में खिंचावमहसूस होना इसके कुछ साइड इफेक्ट हो सकते हैं।
* इसका ज्यादा प्रयोग से धीरे धीरे सीने में दर्द, सांस लेने में दिक्कत और आलस भी पैदा कर सकता है। इससे सर्दी-जुखाम और थकान भी महसूस होती है। इसमें पाये जाने वाले एसिड सामग्रियों की वजह से यह पेट और गले में जलन भी पैदा कर सकता है।
* पेट के निचले भाग में दर्द, उल्टी आना और डायरिया इसके आम दुष्प्रभावों में से एक हैं।
* अजीनोमोटो आपके पैरों की मासपेशियों और घुटनों में दर्द पैदा कर सकता है। यह हड्डियों को कमज़ोर और शरीर द्वारा जितना भी कैल्शिम लिया गया हो, उसे कम कर देता है।
* उच्च रक्तचाप की समस्या से घिरे लोगों को यह बिल्कुल नहीं खाना चाहिए क्योंकि इससे अचानक ब्लड प्रेशर बढ़ और घट जाता है।
* व्यक्तियों को इससे माइग्रेन होने की समस्या भी हो सकती है। आपके सिर में दर्द पैदा हो रहा है तो उसे तुरंत ही खाना बंद कर दें।
* अजीनोमोटो की उत्पादन प्रक्रिया भी विवादास्पद है : कहा जाता है कि इसका उत्पादन जानवरों के शरीर से प्राप्त सामग्री से भी किया जा सकता है।


*अजीनोमोटो बच्चों के लिए बहुत हानिकारक है। इसके कारण स्कूल
जाने वाले ज्यादातर बच्चे सिरदर्द के शिकार हो रहे हैं। भोजन में एमएसजी का इस्तेमाल या प्रतिदिन एमएसजी युक्त जंकफूड और प्रोसेस्ड फूड का असर बच्चों के शारीरिक और मानसिक विकास पर पड़ता है। कई शोधों में यह बात साबित हो चुकी है कि एमएसजी युक्त डाइट बच्चों में मोटापे की समस्या का एक कारण है। इसके अलावा यह बच्चों को भोजन के प्रति अंतिसंवेदनशील बना सकता है। मसलन, एमएसजी युक्त भोजन अधिक खाने के बाद हो सकता है कि बच्चे को किसी दूसरी डाइट से एलर्जी हो जाए। इसके अलावा, यह बच्चों के व्यवहार से संबंधित समस्याओं का भी एक कारण है। छिपा हो सकता है अजीनोमोटो अब पूरी दुनिया में मैगी नूडल बच्चे बड़े सभी चाव से खाते हैं, इस मैगी में जो राज की बात है वो है Hydrolyzed groundnut protein और स्वाद वर्धक 635 Disodium ribonucleotides यह कम्पनी यह दावा करती है कि इसमें अजीनोमोटो यानि MSG नहीं डाला गया है। जबकि Hydrolyzed groundnut protein पकने के बाद अजीनोमोटो यानि MSG में बदल जाता है और Disodium ribonucleotides इसमें मदद करता है।

#RajBisht

Friday, October 1, 2021

एक आश का नाम जीवन कथा I



“जीवन कथा”। जैसा नाम वैसा काम, और इस नाम से आज देश से लेकर विदेश तक लगभग सभी वाकिफ हैं।









एक ऐसी संस्था जिसने कई बदहाल जिंदगियों को खुशहाल जिंदगी में बदल कर रख दिया है। कई बेसहारों का सहारा बनकर समाज मे जो मिशाल जीवन कथा ने पेश की है वो आज के समाज में कम ही देखने के लिए मिलती है। किन्तु कई जिंदगियों का सहारा बन चुकी जीवन कथा ऐसे ही जीवन कथा नही बन गयी, इसके पीछे कहानी है कड़े त्याग की, कड़े बलिदान की, कड़ी मेहनत की और कड़े जीवन संघर्ष की और ये त्याग,संघर्ष और मेहनत की कहानी है जीवन कथा के संस्थापक राकेश पंवार की।




उत्तराखंड राज्य के टिहरी जिले के चन्द्रबदनी क्षेत्र में एक छोटा सा गांव है झल्ड। झल्ड गांव में ही एक गरीब परिवार में राकेश पंवार का जन्म हुआ। बचपन इतनी गरीबी में बीता की रहने के लिए सर पर छत का सहारा भी नही था।
बमुश्किल से उनके पिताजी ने एक छोटा सा घर खरीदा परन्तु उस घर मे भी बरसात में पानी अंदर आ जाता था। जैसे कैसे करके उस घर मे दिन बिताए। थोड़ा बड़े हुए तो स्कूल गए पर गरीबी ने फिर भी पीछा नही छोड़ा, स्कूल की फीस और कपड़ो के लिए पैसे नही होते थे। फटे कपड़े और गरीबी के कारण सब दूरी बना कर रखते थे कोई उनका दोस्त बनने को भी तैयार नही होता जो बचपन मे उन्हें बहुत अखरता था। उनकी गरीबी का खूब मजाक भी उड़ाते। साथ में पढने वाले बच्चे चिढ़ाते,फब्तियां कसते की तेरे फटे कपड़े तू हमारे साथ मत रह , पर ऐसे कठिन समय मे उनकी माता जी ने हमेशा उनका साथ दिया और उन्हें उनके लक्ष्य के लिए खूब प्रेरित किया।
बचपन मे लगी गरीबी की ठोकर ने ये तो सिखा दिया था कि बड़ा होकर कुछ बढ़ा करना है पर करना क्या है अभी तक स्पष्ठ नही था। जैसे तैसे गरीबी में बचपन कटा। स्कूल पास किया और जॉब की तलाश में जयपुर पहुंच गए। अनजान शहर एक-दो दिन काम की तलाश में कट गए जितने पैसे जेब मे थे सब खर्च हो चुके थे, फिर भी हार नही मानी और काम तलाश करते रहे किन्तु और दो दिन बाद भी जब कुछ काम नही मिला दो दिन के भूखे पेट के मारे राकेश ने फिर कूड़ेदान में पड़े खाने का सहारा लिया, तब असहाय गरीबी में जीने वाले लोगो के जीवन का एक नया किन्तु भयभीत करने वाला एहसास हुआ कि न जाने कितने लोग ऐसे ही अपना गुजारा करते होंगे।
समय गुजरा काम करते-करते विदेश पहुंचे वर्ष 2010 में।
घरवालों को लगा की चलो अब तो मुसीबत के दिन बीते किन्तु किस्मत को कुछ और ही खेल खेलना था, मुसीबत ने उनका पीछा वहां भी नही छोड़ा। विदेश में काम करते हुए दो वर्ष ही बीते थे कि सितम्बर 2012 में राकेश की तबियत खराब होने लगी, डॉक्टर से जांच कराई तो पता चला कि कैंसर है, और बचना मुश्किल है 90 फीसदी ना बचने और मात्र 10 फीसदी बचने की उम्मीद है। कुछ महीनों पहले जो अंधेरा छंटता हुआ दिख रहा था समय की मार में वो अब अचानक से बिल्कुल गहराने लग गया था। मौत और जिंदगी के बीच बहुत कम फासला रह गया था। मौत और जिंदगी के बीच झूल रहे उस कठिन समय मे उन्होंने सोचा कि अब स्पष्ट है अगर जिंदगी जीत गयी, एक और जीने का मौका मिल गया तो फिर दूसरों के लिए जिऊंगा। कई महीने बिस्तर पर पड़े और इलाज के दौरान उनके दिमाग मे बस यही चलता रहा की ठीक होने पर असहाय लोगों के लिए कुछ करूँगा और उनके द्वारा असहाय लोगो के लिए जीवन समर्पित करने के लिए की गई ये प्राथर्ना ईश्वर ने सुन ली और कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से उन्हें उबार दिया और कुछ कठिन महीनों के बाद वो ठीक हो उठे।
जब वो मौत के मुहं से वापस लौटे तो बस अब एक मकसद था कि गरीबी में जी रहे लोगों के लिए इस नई जिंदगी को समर्पित करना है। और ये सोच धरातल पर वर्ष 2018 में जीवन कथा के रूप में हम सब के बीच आयी। जिसमे पहली जो मदद थी वो एक कैंसर से पीड़ित व्यक्ति के लिए की गई। उसके बाद जो मदद का सिलसिला शुरू हुआ वो बढ़ता ही गया और कामना करते हैं कि बढ़ता ही रहे। मदद के जो हाथ जीवन कथा ने बढ़ाये हैं बस वो निरन्तरता से बढ़ ही रहे हैं। आज जीवन कथा किसी परिचय की मोहताज नही है। जीवन कथा आज कई गरीब परिवारों का सहारा है। जिसमे हर महीने कई गांवों में गरीब असहाय परिवारों को राशन से लेकर सारी मूलभूत जीवन की जरूरतें जीवन कथा पूरी कर रही है। गरीबों के लिए राशन से लेकर कई गरीब बच्चों की स्कूल फीस, पोशाक तथा चिकित्सा तक कि सुविधाएं जीवन कथा प्रदान कर रही है। जीवन कथा में हजारों दानदाता दान देते हैं जिसका उपयोग गरीबों के जीवन को संवारने के लिए जीवन कथा निरंतर प्रयासरत है। जीवन कथा समय समय पर कई अभियान चलाकर गरीब लोगों तक उनकी आवश्यकता की वस्तुएं प्रदान करती रहती है।
“जीवन कथा” अपने अभियान के तहत ठंड में गरीबो को कंबल- कपड़े बांटना, गरीब बच्चों की पूरी साल की फीस भरना, ज्यादा से ज्यादा असहाय लोगो तक राशन पहुंचाना, असहाय गरीब परिवारों की चिकित्सा, आर्थिक असहाय बच्चों को पढ़ने लिखने का सामान उबलब्ध करवाने से लेकर उनके लिए घर बनाने तक का कार्य जीवन कथा बड़ी कुशलता से कर रही है। अबतक जीवन कथा लगभग 15 से ज्यादा स्कूलों में 100 से ज्यादा असहाय बच्चों की स्कूल फीस की सहायता कर चुकी है, लगभग 95 से अधिक असहाय परिवारों को आटा, चावल, दाल, तेल, साबुन, नमक, मसाले और जरूरी रोज़मर्रा का सामान निरन्तर पहुंचा रही है। कई असहाय लोगो की चिकित्सा में सहायता कर चुकी है तो साथ ही साथ असहाय गरीब लोगों के लिए मकान निर्माण का भी कार्य कर रही है। जीवन कथा में कई स्वयंसेवक कार्य कर रहे हैं जो असहाय और गरीबी के कारण जीवन से निराश हो चुके लोगो को उनके घरों तक खुद पैदल और गाड़ियों की सहायता से जरूरतमंद सामान पहुंचाकर उनकी जिंदगियों को रोशन करने में पूरी जी जान से मेहनत कर लोगों के लिए एक मिसाल पेश कर रहे हैं। जीवन कथा का लक्ष्य ज्यादा से ज्यादा असहाय लोगो तक पहुंच कर उनकी सहायता करना है। जीवन कथा का सोशल मीडिया फेसबुक पर “जीवन कथा” नाम से एक अपना पेज भी है जिस पर आपको जीवन कथा के लोगों की मदद के कई वीडियो मिल जायेंगे कि स्वयंसेवक जीवन कथा की सहायता से कैसे उनकी मदद करते हैं। जीवन कथा का अपना कार्यलय भी है जो टिहरी गढ़वाल के जामनीखाल में स्थित है।
जीवन कथा के जनक राकेश पंवार इस पेज पर लाइव आकर जीवन कथा से जुड़े सभी पहलुहों को लोगो तक पहुंचाते हैं। जीवन कथा अब अपना एक और नया कदम वृक्षारोपण करने की दिशा में भी बढ़ा चुकी है जिसमे 500 से 600 वृक्षों का वृक्षारोपण जामनीखाल से मां चन्द्रबदनी मंदिर तक किया जाएगा।
राकेश पंवार जीवन कथा के माध्यम से कभी भी जीवन कथा को दान करने वाले दानदाताओं का धन्यवाद करना नही भूलते हैं। हम भी धन्यवाद करते हैं कि धन्य हैं वो सब दानदाता जो जीवन कथा में दान करके अपना सहयोग असहाय लोगों की सहायता करने में दे रहे हैं, धन्य हैं वो स्वयंसेवक जो इस कार्य को पूरी निष्ठा से आगे बढ़ा रहे हैं और धन्य हैं राकेश पंवार जिन्होंने असलियत में इंसानियत को जिंदा रख मदद का हाथ असहाय लोगो के लिए आगे बढ़ाया और इस अमूल्य सोच जीवन कथा की स्थापना की। हम कामना करते हैं आपकी इस अमूल्य सोच ने जो जीवन कथा का रूप लिया है ये खूब आगे बड़े, सहायता के लिए ज्यादा से ज्यादा हाथ असहाय लोगों तक बढ़ाए और असहाय लोगों की जिंदगी में खुशहाली की रोशनी जैसे भर रही है ऐसे ही हमेशा जीवन कथा सबके जीवन में रोशनी भरती रहे। राकेश पंवार ने जो जीवन कथा के रूप में हमको दिशा दिखाई है हम सबको मिलकर उसपर आगे बढ़ना चाहिए ताकि हमारी इंसानियत जिंदा रहे। हम सब जीवन कथा के अनन्त तक लोगों की सहायता करने और राकेश पंवार जी की लंबी और खुशहाल जीवन की कामना करते हैं । जीवन कथा अपने अमूल्य योगदान के लिए हम सबके लिए एक सीख है जो हमें इंसान होने का और इंसानियत की मदद करने का पाठ पढ़ाती है। जीवन कथा को मेरा ह्रदय से धन्यवाद और प्रणाम।
“कड़े इम्तिहान देने पड़ते हैं जिंदगी में यूं ही आसानी से नही ‘जीवन कथा’ का आगाज हो जाता”।










राज बिष्ट

ये भी पढ़े